भूखे पेट सोए, काम पाने के लिए दर-दर भटके और आज बॉलीवुड में कर रहे हैं राज, ऐसी है मनोज बाजपेयी के स्ट्रगल की कहानी


फिल्मी दुनिया चकाचौंध से भरी हुई दुनिया है. और इसीलिए ये दुनिया सभी को अपनी ओर खींचती है. लेकिन हर किसी को यहां वो मुकाम हासिल नहीं हो पाता. जबकि कुछ इसी इंडस्ट्री के लिए ही बने होते हैं जिनका जन्म होता है लोगों के दिलों पर राज करने के लिए. उन्हीं में से एक हैं अभिनेता मनोज बाजपेयी. जिनकी एक्टिंग ही उनकी पहचान है. सधी हुई एक्टिंग की झलक देखनी हो तो भला मनोज बाजपेयी से बेहतर और क्या होगा. 

आज मनोज कामयाबी के शिखर हैं जहां से सब बहुत ही शानदार नज़र आता है. लेकिन इस कामयाबी को पाने के लिए उन्हें एक कठिन डगर से भी गुज़रना पड़ा जिस पर चलते हुए वो कई बार डगमगाए, निराश हुए, हताश हुए लेकिन चलते गए और एक दिन उन्होंने अपनी मंज़िल को पा लिया. कामयाब होकर वो अपने उन दिनों को भूले भी नहीं है. बल्कि हाल ही में उन्होंने वो यादें ताज़ा की. उन्होंने खुद बताया कि वो दौर कितनी मुश्किलों भरा था. 

कठिनाईयों भरी थी शुरुआत

जब एक्टिंग में नाम कमाने का सपना लिए मनोज मुंबई नगरिया पहुंचे, तो सबसे पहले उन्हें आर्थिक परेशानियों से जूझना पड़ा. जेब में ज्यादा पैसे नहीं थे. ऐसे में मुंबई में गुज़ारा होता तो होता कैसे. नतीजा…कई बार भूखे पेट ही सोना पड़ा. बॉलीवुड में उन पर किसी का हाथ नहीं था सो लगे रहे दिन रात मेहनत करने में. मनोज ने एक इंटरव्यू में बताया था, ‘बेंडिट क्वीन’ के बाद हम में से कई एक्टर मुंबई शिफ्ट हो गए थे. जिंदगी बहुत मुश्किल भरी निकली. दिल्ली में कम से कम हम थिएटर तो कर रहे थे. दिल्ली में पैसा नहीं मिलता था, लेकिन दोस्त मदद करने के लिए तैयार रहते थे. एक-दूसरे को खाना खिला दिया करते थे. मुंबई में हमारे पास काम ही नहीं था. खाना खाने के पैसे नहीं थे. हम जानते ही नहीं थे कि हमें खाना कब मिलेगा. शुरुआत के चार से पांच साल काफी मुश्किल भरे निकले. पहले तीन तो बहुत ज्यादा मुश्किल वाले थे, पर्सनली और प्रोफेशनली दोनों तरफ से.’

मनोज के कंधों पर ही थी घर की जिम्मेदारी

तस्वीर: सोशल मीडिया

अभिनेता मनोज बाजपेयी घर में सबसे बड़े थे, पिता की तबीयत खराब थी लिहाज़ा सारी जिम्मेदारी इन्ही के कंधों पर थी. लेकिन मुंबई में कुछ बात बन नहीं रही थी. तब मनोज खुद फिल्मों के सेट पर जाते काम मांगने, तो कभी प्रोड्यूसर और डायरेक्टरों के ऑफिसों के चक्कर लगाते. यानि कुल मिलाकर वो दौर उनके लिए काफी मुश्किल था. लेकिन आखिरकार उन्हें राम गोपाल वर्मा की ‘दौड़’ फिल्म में काम करने का मौका मिला. और बस उनकी रेलगाड़ी पटरी पर दौड़ पड़ी. उनकी एक्टिंग से इम्प्रेस आरजीवी ने उन्हें ‘सत्या’ में कास्ट किया. जिसमें उन्होंने भीखू म्हात्रे का रोल निभाया और खूब तारीफ लूटी. आज भी मनोज को इस रोल के लिए सबसे ज्यादा याद किया जाता है. बस तब से आज तक मनोज को कभी पीछे मुड़कर देखने की ज़रुरत नहीं पड़ी. और वो कामयाबी को छूते ही जा रहे हैं.  

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